Friday, December 23, 2016

Geography GK part 1

1. पवन क्या हैं ?
➨एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलने वाली वायु ।
2. पवनें हमेशा किस क्षेत्र की ओर चलती हैं ?
➨उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब वाले क्षेत्रों की ओर ।
3. पृथ्वी की किस गति के कारण पवनें अपनी मूल दिशा से विक्षेपित होती हैं ?
➨घूर्णन
4. कॉरिओलिस बल का मतलब क्या है ?
➨पृथ्वी की घूर्णन गति की वजह से पवनें अपनी मूल दिशा से विक्षेपित हो जाती हैं । इस विक्षेपक बल को सर्वप्रथम कॉरिओलिस विद्वान ने देखा । इसलिए इसे कॉरिओलिस बल कहते हैं ।


5. कॉरिओलिस बल का मतलब क्या है ?
➨पृथ्वी की घूर्णन गति की वजह से पवनें अपनी मूल दिशा से विक्षेपित हो जाती हैं । इस विक्षेपक बल को सर्वप्रथम कॉरिओलिस विद्वान ने देखा । इसलिए इसे कॉरिओलिस बल कहते हैं ।
6. कॉरिओलिस बल का मतलब क्या है ?
➨पृथ्वी की घूर्णन गति की वजह से पवनें अपनी मूल दिशा से विक्षेपित हो जाती हैं । इस विक्षेपक बल को सर्वप्रथम कॉरिओलिस विद्वान ने देखा । इसलिए इसे कॉरिओलिस बल कहते हैं ।
7. फेरेल का नियम क्या है ?
➨कॉरिओलिस बल के अनुसार उत्तरी गोलार्द्ध में पवनें दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बाईं ओर मुड़ जाती हैं । इस विक्षेप को फेरेल ने सिद्ध किया था । इसलिए इसे फेरेल का नियम कहते हैं ।
8. एक ही दिशा में साल चलने वाली पवनों को क्या कहते हैं ?
➨भूमंडलीय या स्थायी पवनें
9. स्थायी पवनें कितने प्रकार की हो सकती हैं ?
➨तीन- 1. वाणिज्य 2. पछुआ 3. ध्रुवीय
10. वाणिज्य पवनें किसे कहते हैं ?
➨30 अक्षांशों के निकट स्थित उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंध से निम्न अक्षांशों तक चलने वाली पवनें ।
11. पछुआ पवनें क्या होती हैं ?
➨दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंधों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंधों की ओर चलने वाली स्थायी हवा को पछुआ पवन कहते हैं । इसकी दिशा पश्चिम होती है ।
12. पछुआ पवन का विकास किन अक्षांशों पर अधिकतम है ?
➨40 से 65 दक्षिण अक्षांशों के मध्य ।
13. गरजते चालीसा, प्रचंड पचासा और चीखते साठा के नाम से किस पवन को बुलाया जाता है ?
➨पछुआ पवन
14. ध्रुवीय पवनें क्या होती हैं ?
➨ध्रुवीय उच्चदाब कटिबंध से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंध की ओर प्रवाहित पवन को ध्रुवीय पवन के नाम से जाना जाता है ।
15. मौसमी पवनें या अस्थायी पवनें किसे कहते हैं ?
➨मौसम या समय परिवर्तन के साथ जिन पवनों की दिशा में परिवर्तन हो जाता है उन्हें मौसमी या अस्थायी पवन कहते हैं । जैसे- मानसूनी पवन, स्थल समीर, समुद्री समीर इत्यादि ।

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