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Tuesday, November 29, 2016

दैनिक समसामयिकी 28 November 2016(Monday)

1.अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए पैकेज की डोज
• नोटबंदी के बाद कमजोर पड़ी मांग को उठाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केंद्र एक विशेष पैकेज देने पर विचार कर रहा है। इस पैकेज का स्वरूप कैसा होगा अभी यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन इसके जरिये सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
• सूत्रों के अनुसार, नोटबंदी के फैसले का असर वित्त वर्ष 2016-17 कीतीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों पर पड़ना तय है। नोटबंदी से निजी उपभोग व्यय में कमी आई है और कुछ कंपनियों ने उत्पादन में भी कटौती की घोषणा की है। 

• इन सभी कारकों के चलते तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि घटकर छह प्रतिशत से भी नीचे आ सकती है। साथ ही चौथी तिमाही पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है क्योंकि उत्पादन घटने से संगठित और असंगठित क्षेत्र में लगे लोगों की आय पर नोटबंदी के फैसले का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
• ऐसी स्थिति में चालू वित्त वर्ष में 7 से 7.5 प्रतिशत विकास दर के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा।
• सूत्रों का कहना है कि अर्थव्यवस्था को नोटबंदी के असर से उबारने तथा कृषि और असंगठित क्षेत्र की स्थिति बेहतर करने खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग बढ़ाने के लिए सरकार स्टिमुलस पैकेज का एलान कर सकती है। इसके तहत सरकार का पूरा जोर सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर होगा।
• उल्लेखनीय है कि सितंबर 2008 की ग्लोबल मंदी की मार से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तत्कालीन संप्रग सरकार ने राजकोषीय पैकेज दिया था।
• उस समय सरकार ने ढांचागत क्षेत्र में व्यय बढ़ाने के लिए न सिर्फ 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त योजनागत आवंटन किया बल्कि सेनवेट की दर में भी कटौती की थी जिससे विभिन्न उत्पाद सस्ते हुए और मांग बढ़ी।
• हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि 500 रुपये और 1000 के पुराने नोट बंद करने के सरकार के फैसले का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
• उनकी दलील है कि नोटबंदी के बाद बैंकों के पास पर्याप्त लिक्विडिटी होगी जिसे वे ढांचागत क्षेत्र, मैन्यूफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र में उधार दे सकेंगे। आने वाले दिनों में ब्याज दरों में भी कमी आने के आसार हैं।
• चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का बजट 19,78,060 करोड़ रुपये है। सूत्रों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष का बजट 22 से 23 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। सरकार निजी उपभोग व्यय को बढ़ाने के साथ-साथ सार्वजनिक व्यय में वृद्धि पर जोर देगी।
• असल में सरकार की पूरी कोशिश सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आम बजट में आवंटित योजनागत राशि में से 58.7 प्रतिशत खर्च हो चुकी है जो एक रिकॉर्ड है। इससे पहले किसी भी वित्त वर्ष में खर्च में इतनी तेजी देखने को नहीं मिली।
2. भारतीयों के स्विस खातों की जानकारी पाने के प्रयास तेज
• विदेशों में जमा काले धन को पकड़ने के अपने प्रयासों को तेज करते हुए भारत ने हाल के महीनों में स्विट्जरलैंड सरकार को ‘‘प्रशासनिक सहयोग’ के लिए 20 अनुरोध भेजे हैं। इनमें कर चोरी करने के लिए स्विस बैंकों का इस्तेमाल करने वाले संदिग्ध भारतीयों की जानकारी मांगी गई है।
• भारत ने जिन व्यक्यिों और कंपनियों की जानकारी मांगी है उनमें कम से कम तीन सूचीबद्ध कंपनियों, एक रीयल एस्टेट कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी, दिल्ली के एक पूर्व नौकरशाह की पत्नी, दुबई में रहने वाले भारतीय मूल के एक निवेश बैंकर, कानून से बच कर भागा एक चर्चित व्यक्ति और उसकी पत्नी, संयुक्त अरब अमीरात स्थित एक होल्डिंग कंपनी और विदेशों में बस चुका और संभवत: ट्रेडिंग करने वाले कुछ गुजराती व्यापारी भी शामिल हैं।
• संदेह है कि इनमें से कई लोगों के विदेशी बैंकों में स्विस बैंकों में खाते हैं जो पनामा और ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड जैसे कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले क्षेत्रों में पंजीकृत कंपनियों के जारिए परिचालित किए जा रहे हैं। ‘‘प्रशासनिक सहायता’ अनुरोध के तहत जामनकारी मांगने वाला देश कुछ तयों और सबूतों के आधार पर सूचनाओं के लिए अनुरोध करता है।
• इस अनुरोध को स्विट्जरलैंड के कानूनों के अनुसार संघीय गजट में प्रकाशित कराया जाता है ताकि संबंधित व्यक्ति चाहे तो उस पर कोई आपत्ति उठा सके। गौरतलब है कि भातर ने हाल में स्विट्जरलैंड की सरकार के साथ स्विस खातों के बारे में सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था का समझौता किया है। इसके तहत सितम्बर 2018 से आगे की अवधि के बारे में सूचनाओं का स्वचालित तरीके से आदान-प्रदान होगा।
• पिछले हफ्ते भारत और स्विट्जरलैंड ने स्वत: जानकारी आदान-प्रदान के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें सितम्बर 2018 के बाद के खातों की जानकारी स्वत: साझा की जाएगी। इसके अलावा बाकी अनुरोधों का निस्तारण मौजूदा द्विपक्षीय कर संधि के माध्यम से होगा।
3. बुनियादी परियोजनाओं की लागत में भारी वृद्धि
• देश में 273 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में 1.77 लाख करोड़ रपए का इजाफा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी में विलंब की वजह से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।अगस्त, 2016 में सांख्यिकी एवं कार्यक्र म क्रि यान्वयन मंत्रालय ने अगस्त, 2016 में 1,167 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी की।
• ये परियोजनाएं बिजली, रेलवे और सड़क जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं जो 150 करोड़ रपए या उससे अधिक की हैं।मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 1,167 परियोजनाओं में से 282 निर्धारित समयसीमा के हिसाब से आगे बढ़ रही हैं। 337 में देरी हुई है, 273 परियोजनाओं की लागत में इजाफा हुआ और 85 परियोजनाएं ऐसी हैं जो देरी से तो चल ही रही हैं वहीं उनकी लागत में भी बढ़ोतरी हुई है।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,167 परियोजनाओं की क्रि यान्वयन की लागत 14,33,476.53 करोड़ रपए है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने की अनुमानित लागत 16,10,504.54 करोड़ रपए पर पहुंच गई। इस तरह इन परियोजनाओं की लागत में 1,77,028.01 करोड़ रपए या 12.35 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
• रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त, 2016 तक इन परियोजनाओं पर खर्च 6,30,581.41 करोड़ रपए हुआ है। यह इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत का 39.15 प्रतिशत है।
• देरी वाली 337 परियोजनाओं में से 68 एक से 12 महीने की देरी से चल रही हैं। 54 परियोजनाओं में 13 से 24 महीने, 138 में 25 से 60 महीने तथा 77 में 61 या अधिक माह की देरी है।
4.किन्नरों के लिए आरक्षण फॉर्म में अलग कॉलम
• भारतीय रेल के 163 साल के इतिहास में पहली बार किन्नरों के लिए आरक्षण फॉर्म में अलग से कॉलम बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के अनुरोध पर रेलवे को यह निर्देश दिया था।
• रेलवे के आरक्षण फॉर्म में पुरुष व महिला के लिए अलग-अलग कॉलम बने हैं। अगर किन्नर किसी ट्रेन की आरक्षित श्रेणी में सफर करते हैं तो उन्हें इन्हीं दो में एक कॉलम में टिक करना पड़ता है। दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था में अब बदलाव किया गया है।
• नए नियम के मुताबिक अब अगर किन्नर आरक्षण फॉर्म भरेंगे तो उन्हें थर्ड जेंडर के कॉलम का विकल्प मिलेगा। महिला किन्नर को टी/एफ और पुरुष किन्नर को टी/एम लिखना होगा। नई व्यवस्था के तहत सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (क्रिस) के सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जाएगा।
5. लक्ष्य की ओर अग्रसर ‘‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’
• सुरक्षित गर्भावस्था एवं सुरक्षित प्रसव के माध्यम से जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान लक्ष्य की प्राप्ति की ओर बढ़ रहा है। अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को परिवार कल्याण केंद्रों, चिकित्सालयों में गर्भवती महिलाओं के स्वस्य की मुफ्त जांच की जा रही है, जिसकी पांचवी मंथली रिपोर्ट के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
• गर्भस्थ महिलाएं खुद पहुंच रही हैं केंद्र :राष्ट्रीय स्वास्य मिशन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसएल वर्मा ने कहा कि अभियान की शुरुआत इस वर्ष 9 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसमें हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के स्वास्य की मुफ्त जांच व पंजीकरण किया जाता है।
• इस बीच रविवार को अभियान की पांचवीं मंथली रिपोर्ट की समीक्षा पेश की गई जिसके सकारात्मक परिणाम मिले। रिपोर्ट में महिलाएं गर्भ धारण करने के या फिर शिशु पैदा करने की प्लानिंग करने वाली महिलाओं के साथ ही उनके पति व अन्य रिश्तेदार उन्हें उनके स्वास्य का स्टेट्स जानने और टीकाकरण के फायदों के बारे में तकनीकी जानकारियां लेने के लिए खुद आ रहे हैं।
• मसलन इन टीकों को लगवाने से कौन सी बीमारियां से बचा जा सकेगा और इसे लगवाने से जच्चा-बच्चा के जीवन में किस तरह का सुधार होगा। खून की कमी के ज्यादा मामले :अभियान में पाया गया कि महिलाओं में खून की कमी के 60 फीसद मामले दर्ज किए गए।
• इन्हें कैल्शियम व अन्य पौष्टिक तत्वों के सेवन करने के बारे में भी बताया जा रहा है। भा रहा है, जागरूकता का तरीका : खून की कमी, उच्च रक्तचाप, कम वजन, जच्चा-बच्चा दोनों के जीवन के लिए खतरनाक माना जाता है। अभियान के जरिए हम अब गर्भ ठहरने के पहले से तीसरे महीने में इन बीमारियों की आशा वर्कर्स, एएनएम के माध्यम से पहचान कर 70 फीसद के लक्ष्य को पूरा करने के करीब है।
• रक्ताल्पता, उच्च रक्तचाप पीड़ित महिला जब गर्भ धारण करती है तो ऐसी हालत कोख में पलने वाले शिशु की विकास दर असामान्य होने की संभावना भी बनी रहती है। योजना प्रारंभ होने से पहले मुश्किल से 30 से 35 फीसद महिलाएं ही गर्भधारण करने के एक से तीन माह के भीतर हेल्थ सेंटर पहुंचती थी। वे यहां तब आती थी जब गर्भ ठहरने के 4 से 6 माह का समय बीत चुका रहता था, विलंब से आने की वजह से हम अविकसित बेबी को स्वस्थ जीवन देने में कठिनाई महसूस करते थे।
• जागरूकता शुरुआत में ही यदि बीमारी की पहचान कर ली जाए तो मातृ एवं बाल मृत्यु दर के लक्ष्य को शून्य स्तर पर लाया जा सकता है। सुबह से भीड़ थी गर्भवती महिलाओ की : प्राथमिक अस्पताल, नीलोखेड़ी के डिप्टी सीएमओ डा. सतबीर सिंह ने कहा कि महिलाओं के साथ ही उनके परिजनों में भी स्वास्य के प्रति जागरूकता आ रही है।
• 9 जुलाई 2016 में इस केंद्र में 126 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई जिसमें से 28 हाई रिस्क कैटेगरी में पाई गई। इसी तरह अगस्त माह में 211 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग में से 44, सितम्बर में 177 में से 42, अक्टूबर में 115 में से 22, और 27 नवम्बर यानी रविवार को 234 में से 67 महिलाएं जोखिम अवस्था में पहचान की गईं।
• इन महिलाओं का डिजिटिकरण पंजीकरण किया गया है। इसमें बच्च के जन्म लेने और एक साल तक दोनों की सेहत पर निगरानी रखी जाएगी। प्रसव पूर्व देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है : यूनिसेफ के बालरोग विशेषज्ञ डा. गगन गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर का यह कार्यक्रम उच्च जोखिम की गर्भावस्था की पहचान एवं रोकथाम करने तथा तकरीबन 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क प्रसव पूर्व देखभाल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
• यह देश में जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में गिरावट लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। हम उन महिलाओं को लक्षित कर रहे हैं जिन्हें न्यूनतम जांच एवं चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाती जैसे एएनसी जांच और दवाएं जैसे आईएफए एवं कैल्शियम सप्लीमेंन्ट आदि। क्लीनिकों में गर्भवती महिलाओं को ये जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
• निदान एवं उपचार के अलावा काउन्सलिंग भी गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासतौर पर उच्च जोखिम के मामलों में। अभियान का उद्देश्य : डिप्टी सीएमओ डा. नीलम वर्मा ने कहा कि ‘‘हालांकि जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में कमी लाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए हैं।
• प्रोग्राम इस तय पर आधारित है कि अगर भारत में हर गर्भवती महिला की ठीक से जांच की जाए, उसे जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की मौत को रोका जा सकता है।’

Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

दैनिक समसामयिकी 28 November 2016(Monday)

1.अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए पैकेज की डोज
• नोटबंदी के बाद कमजोर पड़ी मांग को उठाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केंद्र एक विशेष पैकेज देने पर विचार कर रहा है। इस पैकेज का स्वरूप कैसा होगा अभी यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन इसके जरिये सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
• सूत्रों के अनुसार, नोटबंदी के फैसले का असर वित्त वर्ष 2016-17 कीतीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों पर पड़ना तय है। नोटबंदी से निजी उपभोग व्यय में कमी आई है और कुछ कंपनियों ने उत्पादन में भी कटौती की घोषणा की है। 

Monday, November 28, 2016

दैनिक समसामयिकी 27 November 2016(Sunday)

1.जजों की नियुक्ति पर न्यायपालिका तथा सरकार के मध्य तकरार
• जजों की नियुक्ति पर चल रही तनातनी के बीच शीर्ष न्यायपालिका और सरकार की तकरार एक बार फिर खुले रूप में सामने आई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने एक बार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उच न्यायालयों में जजों के 500 पद खाली पड़े हैं।
• इसी तरह न्यायाधिकरणों में भी जजों को सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वहां नहीं जाना चाहते।
• ठाकुर के इस बयान पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी तत्काल पलटवार किया और कहा कि कानून बनाने का काम विधायिका के जिम्मे ही रहना चाहिए। समस्याओं का समाधान तभी होगा, जब सभी अंग साथ मिलकर काम करेंगे। 

• अदालत निर्देश जारी करे, सरकार के आदेशों को खारिज करे, लेकिन प्रशासन चलाने का काम उन्हीं लोगों के हाथ में रहे जिनको सरकार चलाने के लिए चुना गया है। प्रसाद ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान की दुनियाभर में इजत है, क्योंकि यह अमीर-गरीब या छोटे-बड़े में कोई फर्क नहीं करता।
• लोगों को भरोसा है कि वे किसी भी राजनेता को सत्ता से हटा सकते हैं। किसी भी राजनीतिक पार्टी को हटा सकते हैं।
• चीफ जस्टिस ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के वार्षिक सम्मेलन में जजों की नियुक्ति में विलंब को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
• इसके अलावा तमाम टिब्यूनलों की खस्ताहाली को लेकर भी सरकार की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों में भी जजों की संख्या में भारी कमी है। जजों की कमी और सुविधाओं के अभाव में न्यायाधिकरण अलग बेंच नहीं स्थापित कर पा रहे।
• इसके चलते मुकदमे पांच से सात साल तक लंबित रह रहे हैं।द्यचीफ जस्टिस ठाकुर ने हाई कोर्ट में जजों के रिक्त पद का मुद्दा उठाया
• कानून मंत्री ने कहा, प्रशासन चलाने का काम सरकार के पास ही.इस समय देश में अदालत के अनेक कक्ष खाली हैं। इनके लिए जज उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी संख्या में प्रस्ताव लंबित हैं। उम्मीद है सरकार इस संकट को खत्म करने के लिए इसमें हस्तक्षेप करेगी।
2. लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं : कुरैशी
• लोकसभा और देश भर की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने भी सहमति जताई है।
• उन्होंने कहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का विचार बेहद अछा है। लगातार होते रहने वाले चुनावों की वजह से सरकार के फैसले अटक जाते हैं।
• कुरैशी ने देश भर में ये सभी चुनाव साथ कराने के विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा, ‘लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव बहुत अछा विचार है।’
• इसी तरह उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान लगने वाली अवधि को भी घटाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार चुनाव प्रक्रिया के लिए जरूरी अर्धसैनिक बलों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सके तो आयोग इस काम को और कम समय में पूरा कर सकता है।
• पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक चुनाव की अवधि को कम करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि जितने दिनों तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू रहती है, सरकार के सभी प्रमुख फैसले लटके रहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चूंकि देश लगातार चुनाव के माहौल में रहता है, इसलिए जाति और धर्म के मुद्दे भी लगातार छाए रहते हैं।
• चुनाव के जाने के बाद ये मद्दे भी शांत हो जाते हैं। अगर एक साथ चुनाव करवाए जा सके तो इससे इन मुद्दों को भी कमजोर किया जा सकेगा।
• संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि काला धन के खिलाफ उठाए गए नोटबंदी के कदम के बाद अब वे चुनाव सुधार को ले कर भी गंभीर कदम उठाना चाहते हैं।
• उन्होंने सभी पार्टियों को प्रस्ताव किया था कि अगर वे सहमत हों तो देश भर में सभी चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं।
3. इन्फ्रास्ट्रक्चर, विदेश व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर निवेश जरूरी
• पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा है कि सात से साढ़े सात फीसद की विकास दर को बनाए रखने के लिए अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी।
• उन्होंने कहा कि खासतौर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर और विदेश व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर निवेश होता रहना चाहिए।
• भारत में आर्थिक सुधारों के जनक माने जाने वाले डॉ. सिंह ने पीएचडी चैंबर आफ कॉमर्स के सालाना अधिवेशन में अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक नीतियों का निर्धारण इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे विकास की प्रक्रिया बाधित न हो।
• इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि समेकित विकास की जरूरतों का सरकारी खर्च, वित्तीय स्थिरता, रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के साथ समन्वय बनाया जाए। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हालांकि अब भी सात से साढ़े सात फीसद की दर से विकास कर रहा है। लेकिन इस दर को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था में निरंतर निवेश की गति बनी रहे।
• उन्होंने कहा कि भारत अब 1991 की आर्थिक सुधारों के दौर से निकलकर सतत विकास के दौर में प्रवेश कर रहा है। इसलिए अब देश की प्राथमिकता न केवल इस रफ्तार को तेज करने पर होनी चाहिए बल्कि विकास के बहुआयामी पक्षों, इक्विटी, समेकित रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण पर भी पूरा ध्यान होना चाहिए।
• सिंह ने कहा कि ऐसे वक्त में उच्च शिक्षा, गरीबी उन्मूलन और कुपोषण जैसी चुनौतियों की पहचान भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए आर्थिक विकास और उसकी स्थिरता इसके अनिवार्य पहलू हैं।
• पीएचडी की सालाना बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी हिस्सा लिया।
4. सरकार ने सार्वजनिक किया जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून का मसौदा
• देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद रायों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई केंद्र प्रत्येक तिमाही पर करेगा। लेकिन अंतिम तौर पर सालाना मुआवजे की राशि का फैसला नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) के ऑडिट के बाद ही तय किया जाएगा।
• इस क्षतिपूर्ति का भुगतान जीएसटी के तहत लक्जरी व तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले अतिरिक्त सेस से प्राप्त राजस्व से किया जाएगा।
• सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक यह सेस (उपकर) जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल के लिए लगाया जाना है। इस दौरान जितनी धनराशि जीएसटी कंपनसेशन फंड के तहत इकट्ठा होगी, उसे रायों और केंद्र के बीच बांट दिया जाएगा।
• यह बात जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून के मसौदे में कही गई है। इस मसौदे को सरकार ने सार्वजनिक चर्चा के लिए शनिवार को जारी किया।
• मसौदे के मुताबिक सेस से एकत्र फंड के पांच साल बाद बचने वाले हिस्से का आधा भाग देश की समेकित निधि में जमा होगा। इस प्रकार यह राशि देश के कुल कर संग्रह का हिस्सा बन जाएगी।
• बाद में तय नियमों के मुताबिक इसे आनुपातिक आधार पर रायों और सरकार के बीच बांट दिया जाएगा। बाकी पचास फीसद हिस्से को रायों के बीच उन्हें एक वर्ष पहले प्राप्त एसजीएसटी राजस्व संग्रह के अनुपात में बांटा जाएगा।
• इस मसौदे के मुताबिक अगर कैग के ऑडिट के मुताबिक रायों को मिले मुआवजे की रकम उसकी निर्धारित मात्र से अधिक पाई गई तो उसे अगले वित्त वर्ष में समायोजित कर दिया जाएगा। रायों को होने वाले राजस्व नुकसान का आकलन जीएसटी के तहत प्राप्त होने वाले राजस्व और पुरानी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत मिलने वाले राजस्व के अंतर से होगा।
• पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत मिले राजस्व में 2015-16 को आधार वर्ष मानते हुए 14 फीसद वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।
• मुआवजा कानून के इस मसौदे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल अपनी अगली बैठक में विचार करेगी। काउंसिल की बैठक आगामी 2-3 दिसंबर को होनी है। काउंसिल इससे पूर्व जीएसटी के टैक्स ढांचे के तहत कर की चार दरों का प्रस्ताव कर चुकी है।
• केंद्र ने जीएसटी मुआवजा बिल को सार्वजनिक किया
• खातों की लेखा परीक्षा के बाद ही तय होंगे अंतिम आंकड़े
• नुकसान की भरपाई के लिए लगाया जाएगा उपकर
• भोग विलासिता और तंबाकू जैसे उत्पादों पर लगेगा यह कर
• जीएसटी लागू होने के बाद पांच साल तक जारी रहेगा यह उपकर
• इस उपकर से बनाया जाएगा 50,000 करोड़ रपए का कोष
• जीएसटी परिषद की 2 व 3 दिसम्बर को होगी बैठक

5. रूस भी कर सकेगा ग्वादर बंदरगाह का इस्तेमाल
• रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह का अब रूस भी इस्तेमाल कर सकेगा। व्यापार के लिए बंदरगाह का इस्तेमाल करने के रूसी प्रस्ताव को पाकिस्तान ने मंजूरी दे दी है।
• पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से जियो न्यूज ने शनिवार को यह जानकारी दी। ईरान और तुर्कमेनिस्तान के बाद रूस ऐसा तीसरा देश है जिसे पाक ने इस तरह की इजाजत दी है।
• रिपोर्ट के अनुसार रूस ने चीन-पाक आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का हिस्सा बनने और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक रक्षा संबंध विकसित करने की भी इछा जताई है। यह शीतयुद्धकाल के प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच बढ़ती करीबी का संकेत है।
• विशेषज्ञों के अनुसार रूस के साथ संबंधों को मजबूती देने के लिए पाकिस्तान आतुर है। एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री पर अमेरिकी रोक के बाद इस्लामाबाद को एक ऐसे साथी की तलाश है जो उसकी रक्षा जरूरतों को पूरा कर सके।
• तुर्कमेनिस्तान के दौरे पर गए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी सीपीईसी का हिस्सा बनने के रूसी प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आधी दुनिया को लाभ पहुंचाने वाली इस परियोजना में कई देश शामिल होना चाहते हैं।
• शरीफ ने दक्षिण और मध्य एशिया के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए तुर्कमेनिस्तान-पाकिस्तान-अफगानिस्तान-भारत (तापी) के साथ 1,680 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन के किनारे रेलवे, सड़क और फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने की भी घोषणा की।
• गौरतलब है कि तीन हजार किलोमीटर लंबा सीपीईसी गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत की आपत्तियों को दरकिनार कर चीन इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है।
• इसके पूरा होने पर मध्य-पूर्व एशिया और अफ्रीका तक उसकी पहुंच आसान हो जाएगी। पाकिस्तानी नौसेना ने शुक्रवार को बताया था कि ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नौसेना अपने पोतों की तैनाती भी करेगी।
6. कमर जावेद बाजवा होंगे पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख
• लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा पाकिस्तान के अगले सेना प्रमुख होंगे। उनके नाम को शनिवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकृति दी। वह 29 नवंबर को अवकाश ग्रहण कर रहे जनरल राहील शरीफ का स्थान लेंगे। उन्हें कश्मीर मामले का अछा जानकार माना जाता है।
• पाकिस्तानी सूत्र बताते हैं कि वह जेहादी ताकतों को पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा भी मानते हैं। आने वाला समय बताएगा कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी सेना की मदद में इजाफा होगा या कमी आएगी।
• बाजवा संख्या के लिहाज से दुनिया की छठवीं सबसे बड़ी सेना के प्रमुख होंगे, जो इस समय नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना के साथ वार-प्रतिवार कर रही है। बाजवा कोंगो में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भी काम कर चुके हैं, जहां पर वह भारत में सेना प्रमुख रह चुके जनरल बिक्रम सिंह के मातहत थे।
• लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात को वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति मामनून हुसैन ने दोनों अधिकारियों को प्रोन्नत कर दिया है।
• पाकिस्तान में सेना का वहां की राजसत्ता में प्रभावशाली दखल है। सेना के प्रभाव से ही वहां की विदेश नीति तय होती है और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार काम करती है।
• उल्लेखनीय है कि जनरल शरीफ पिछले 20 साल में पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं, जो निर्धारित सेवाकाल के बाद अवकाश ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें कोई सेवा विस्तार नहीं मिला है।
7. नहीं रहे भारत के दोस्त कास्त्रो
• पड़ोस में रहकर करीब 50 साल तक अमेरिका की आंखों की किरकिरी बने रहे फिदेल कास्त्रो (90) ने शुक्रवार को हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं। वह दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में ही शुमार नहीं थे बल्कि साम्यवादी व्यवस्था के स्तंभ थे, जो सोवियत संघ टूटने के बाद भी नहीं दरका।
• कास्त्रो भारत के अभिन्न मित्र थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से शुरू हुआ दोस्ती का यह सिलसिला इंदिरा गांधी तक प्रगाढ़ रूप में कायम रहा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी है। साम्रायवादी व्यवस्था के विरोधी कास्त्रो ने क्यूबा में शोषण के खिलाफ लड़कर 1959 में साम्यवादी सत्ता स्थापित की थी।
• ताजिंदगी हरे रंग की मिलिट्री पोशाक पहनने वाले कास्त्रो ने अमेरिका की दहलीज पर रहते हुए भी अपने देश में पूंजीवादी व्यवस्था को घुसने नहीं दिया। शायद इसी का नतीजा रहा कि क्यूबा को आज भी दुनिया की सबसे खुशहाल आबादी वाले देशों में गिना जाता है।
• क्रांति के दिनों में फिदेल का नारा दुनिया में बहुत प्रचलित हुआ। वह कहते थे- रुको नहीं, आगे बढ़ते रहो- जब तक विजय न मिल जाए। सन 2006 से कास्त्रो की तबीयत खराब चल रही थी। दो साल बाद उन्होंने सत्ता अपने छोटे भाई राउल कास्त्रो को सौंप दी लेकिन पर्दे के पीछे असली ताकत वही बने रहे।
• क्यूबा के समयानुसार शुक्रवार रात साढ़े दस बजे राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने सरकारी टेलीविजन से घोषणा की कि क्यूबा की क्रांति के सवरेच कमांडर फिदेल अब नहीं हैं। अंतिम संस्कार चार दिसंबर को होगा।
• फिदेल की मौत की घोषणा के बाद लोग शोक में डूब गए, हवाना की सड़कें सूनसान हो गईं। लेकिन अमेरिका के मियामी में क्यूबा से भागकर शरण पाए लोग सड़कों पर आ गए और उन्होंने नाचते और अपने बर्तन बजाते हुए खुशी का इजहार किया।
• कहा जाता है कि अमेरिका विरोधी रुख के चलते वहां की खुफिया संस्था सीआइए ने फिदेल को मारने के कई प्रयास किए लेकिन वह हमेशा असफल रही।
• अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी के कार्यकाल की विदेश नीति में क्यूबा संकट की घटना सबसे महत्वपूर्ण ही है। क्यूबा में 1 जनवरी 1959 को डा. फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में साम्यवादी शासन स्थापित हो गया था। जिससे अमेरिका को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा था।
• कास्त्रो ने क्यूबा में बातिस्ता की सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़कर वहां एक समाजवादी व्यवस्था कायम की थी और आम जनता को उनके अधिकार दिलाने में मदद की थी।
• नस्ली भेदभाव को दूर करने में भी उनकी भूमिका अहम रही। कास्त्रो तीसरी दुनिया के देशों के लिए क्रांति के प्रतीक बने और गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भी उन्होंने महत्वूपर्ण भूमिका निभाई।
• कास्त्रो को अमेरिका के नाक नीचे एक सशक्त कम्युनिस्ट देश की नींव रख कर दशकों तक उसे खुली चुनौती देने वाले एक साहसी और क्रांतिकारी नेता के रूप में याद किया जाता है।
• सोवियत रूस से क्यूबा को भरपूर सैनिक व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी जिससे क्यूबा का नवीनीकरण भी हुआ था। यह अमेरिका को सहन नहीं हुआ। राष्ट्रपति कैनेडी ने इस संबंध में 16 सितम्बर 1962 को क्यूबा की जांच के आदेश दिए। फलस्वरूप अमेरिका ने रूस को जिसके जहाज युद्ध सामग्री लेकर क्यूबा की ओर आ रहे थे, उसे 22 अक्टूबर 1962 रोककर क्यूबा की नाकाबंदी कर दी।
• दक्यूबा की इस नाकाबंदी ने अमेरिका को खुली चुनौती दी कि या वह क्यूबा की मदद बंद करे या युद्ध के लिए तैयार रहे।
• इस घटना से विश्वशांति भंग होने का अंदेशा था। इसलिए रूसी राष्ट्रपति ख्रुश्चेव ने विश्वशांति के हित मंे अपने तैनात हथियारों को हटाना ही उचित समझा। इसे कैनेडी काल की सबसे बड़ी विजय मानी गई।

Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

दैनिक समसामयिकी 27 November 2016(Sunday)

1.जजों की नियुक्ति पर न्यायपालिका तथा सरकार के मध्य तकरार
• जजों की नियुक्ति पर चल रही तनातनी के बीच शीर्ष न्यायपालिका और सरकार की तकरार एक बार फिर खुले रूप में सामने आई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने एक बार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उच न्यायालयों में जजों के 500 पद खाली पड़े हैं।
• इसी तरह न्यायाधिकरणों में भी जजों को सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वहां नहीं जाना चाहते।
• ठाकुर के इस बयान पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी तत्काल पलटवार किया और कहा कि कानून बनाने का काम विधायिका के जिम्मे ही रहना चाहिए। समस्याओं का समाधान तभी होगा, जब सभी अंग साथ मिलकर काम करेंगे। 

Sunday, November 27, 2016

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=>राष्ट्रीय आय

=>राष्ट्रीय आय
- देश में उत्पन्न समस्त वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य की वह मात्रा जो निश्चित समयावधि में दो बार बिना गिने मापी जाए, राष्ट्रीय आय (national income) कहलाती है. साधारणतः शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद को राष्ट्रीय आय कहा जाता है.
=>राष्‍ट्रीय आय को जानने के लिए सूत्र ........
राष्ट्रीय आय = शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (साधारण लागत पर) = बाजार मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद-अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी = (बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद यानी (GDP)+ शुद्ध विदेशी आय-मूल्य ह्रास)-अप्रत्यक्ष कर+सब्सिडी
*****


=>शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद
सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से मूल्य ह्रास की राशि घटाने के बाद शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (nnp) ज्ञात किया जाता है।
*********
=>सकल घरेलू उत्पाद
- किसी देश की सीमा में निर्धारित समयावधि अमूमन एक साल में पैदा वस्तुओं का कुल बाजार मूल्य उस देश का सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है.
******
=>सकल राष्ट्रीय उत्पाद
- सकल राष्‍ट्रीय उत्‍पाद (GNP) का इस्‍तेमाल भी राष्ट्रीय आय लेखांकन में किया जाता है.
इसकी गणना इस तरह से की जाती है कि अगर देश में सृजित लेकिन विदेशों को मिलने वाली आय घटा दी जाए, साथ ही देश को मिलने वाली विदेशों में अर्जित आय जोड़ दी जाए तो इससे सकल राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त होता है.
*****
=>मिश्रित अर्थव्यवस्था
- मिश्रित अर्थव्यवस्था (mixed economy) यानी ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें निजी तथा सरकारी दोनों क्षेत्रों का सह अस्तित्व हो.
- भारत में इस समय मिश्रित अर्थव्‍यवस्‍था ही है. जहां अनेक बड़ी सार्वजनिक कंपनियां हैं तो निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी विकास के समान अवसर उपलब्‍ध हैं.

=>राष्ट्रीय आय

=>राष्ट्रीय आय
- देश में उत्पन्न समस्त वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य की वह मात्रा जो निश्चित समयावधि में दो बार बिना गिने मापी जाए, राष्ट्रीय आय (national income) कहलाती है. साधारणतः शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद को राष्ट्रीय आय कहा जाता है.
=>राष्‍ट्रीय आय को जानने के लिए सूत्र ........
राष्ट्रीय आय = शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (साधारण लागत पर) = बाजार मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद-अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी = (बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद यानी (GDP)+ शुद्ध विदेशी आय-मूल्य ह्रास)-अप्रत्यक्ष कर+सब्सिडी
*****

सर्वोच्च व उच्च न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली रिट और उनकी प्रकृति

भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों का संरक्षक बनाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सरकार को आदेश और निर्देश दे सकते हैं। न्यायालय कई प्रकार के विशेष आदेश जारी करते हैं जिन्हें प्रादेश या रिट कहते हैं और जिनका उद्देश्य मूल अधिकारों का संरक्षण करना होता है। कुछ प्रमुख रिटों व उनकी प्रकृति का उल्लेख निम्नवत् हैं-
(i) बंदी प्रत्यक्षीकरण- यह एक लैटिन शब्दावली है जिसका अर्थ है ‘निरुद्ध व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करो।’ इस रिट के द्वारा न्यायालय किसी गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने का आदेश देता है, विरुद्ध करने के कारणों को बताने को कहता है और यदि गिरफ्तारी का तरीका या कारण गैरकानूनी या असंतोषजनक हो, तो न्यायालय गिरफ्तार व्यक्ति को छोड़ने का आदेश दे सकता है।
इस प्रकार इस रिट का मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से निरुद्ध किये गये व्यक्ति को शीघ्र उपचार प्रदान करना है। सुनील बात्रा बनाम दिल्ली प्रशासन (1980) के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि इस रिट का प्रयोग गिरफ्तार व्यक्ति को केवल गिरफ्तारी से मुक्त कराने के लिए नहीं वरन् जेल में उसके विरुद्ध किये गये अमानवीय और क्रूर बर्तावों से संरक्षण प्रदान करने के लिए भी किया जायेगा। इस रिट की मांग निरुद्ध व्यक्ति की ओर से कोई अन्य व्यक्ति भी कर सकता है।
(ii) परमादेश- परमादेश का शाब्दिक अर्थ है, ‘हम आदेश देते हैं’। इस रिट द्वारा लोक अधिकारी को उसके ऊपर विधि द्वारा आरोपित कर्तव्य के पालन के लिए बाध्य किया जाता है। दूसरे शब्दों में यह आदेश तब जारी किया जाता है जब न्यायालय को लगता है कि कोई सार्वजनिक पदाधिकारी अपने कानूनी और संवैधानिक दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है और इससे किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है।
परमादेश रिट निम्नलिखित परिस्थितियों में जारी नहीं किया जा सकता-
यदि संबंधित अधिकारी का कर्तव्य केवल उसके विवेकीय या व्यक्तिगत निर्णय पर आधारित हो तो परमादेश रिट नहीं जारी किया जायेगा।
निजी व्यक्तियों या निजी संस्थाओं के विरुद्ध परमादेश रिट जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन पर कोई लोक कर्तव्य आरोपित नहीं किया जा सकता है।
परमादेश रिट व्यक्तियों के बीच संविदात्मक कर्तव्यों के पालन के लिए नहीं जारी किया जा सकता।
(iii) प्रतिषेध- जब कोई अधीनस्थ न्यायालय या अधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करके मुकदमे की सुनवाई करती हैं या प्राकृतिक न्याय के नियमों के विरुद्ध कार्य करती हैं तो उनके खिलाफ प्रतिषेध रिट जारी किया जाता है। इस रिट का मुख्य उद्देश्य अधीनस्थ न्यायालयों के द्वारा की गई न्यायिक त्रुटियों को ठीक करना है। इस रिट के जरिये वरिष्ठ न्यायालय अधीनस्थ न्यायालय को उन कार्यवाहियों को आगे बढ़ाने से रोकता है जो उसकी अधिकारिता में नहीं है। प्रतिषेध रिट केवल न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाओं के विरुद्ध जारी किया जाता है। यह कार्यपालिका या प्रशासनिक प्राधिकारियों के विरुद्ध जारी नहीं किया जाता है और न ही विधायिका के विरुद्ध।
(iv) उत्प्रेषण- उत्प्रेषण रिट द्वारा अधीनस्थ न्यायालयों या न्यायिक अथवा अर्द्ध न्यायिक कार्य करने वाले निकायों में चलने वाले वादों को वरिष्ठ न्यायालयों के पास भेजने का आदेश दिया जाता है जिससे उनके निर्णय की जाँच हो सके और यदि वे दोषपूर्ण हों तो उन्हें रद्द किया जा सके। उच्चतम एवं उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालय या अर्ध-न्यायिक निकायों के निर्णयों के विरुद्ध निम्नांकित आधार पर उत्प्रेषण रिट जारी कर सकता है-
* अधिकारिता का अभाव अथवा अधिक्य।
* नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन।
* निर्णय में वैधानिक गलती।
प्रतिषेध व उत्प्रेषण में अंतर
जब कोई अधीनस्थ न्यायालय ऐसे मामले की सुनवाई करता है जिस पर उसे अधिकारिता प्राप्त नहीं है तो वरिष्ठ न्यायालय प्रतिषेध रिट जारी करके अधीनस्थ न्यायालय को उन कार्यवाहियों को आगे बढ़ाने से रोक सकती है, दूसरी ओर यदि अधीनस्थ न्यायालय मुकदमे की सुनवाई कर चुका है और निर्णय दे चुका है तो उत्प्रेषण रिट जारी किया जायेगा और उक्त कार्यवाहियों को रद्द कर दिया जायेगा। संक्षेप में प्रतिषेध रिट एक कार्यवाही के मध्य में जारी होता है, जिससे उस कार्यवाही को रोका जा सके और उत्प्रेषण रिट की कार्यवाही की समाप्ति पर अंतिम निर्णय के विरुद्ध निर्णय को रद्द करने के लिए जारी किया जाता है।
(v) अधिकार पृच्छा- अधिकार पृच्छा का शाब्दिक अर्थ है- "आपका प्राधिकार क्या है"? यह रिट किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जारी किया जाता है जो किसी सार्वजनिक पद को अवैध रूप से धारण किये हुये है। इस रिट द्वारा उससे यह पूछा जाता है कि वह किस प्राधिकार से वह पद धारण किये है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को उस पद के धारण करने से रोकना है जिसे धारण करने का कोई वैध अधिकार नहीं प्राप्त है। यदि जाँच करने पर यह पता चलता है कि उसको धारण करने का कोई अधिकार नहीं था तो न्यायालय अधिकार पृच्छा रिट जारी करके उस व्यक्ति को पद से हटा देगा और उस पद को रिक्त घोषित कर देगा।

सर्वोच्च व उच्च न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली रिट और उनकी प्रकृति

भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों का संरक्षक बनाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सरकार को आदेश और निर्देश दे सकते हैं। न्यायालय कई प्रकार के विशेष आदेश जारी करते हैं जिन्हें प्रादेश या रिट कहते हैं और जिनका उद्देश्य मूल अधिकारों का संरक्षण करना होता है। कुछ प्रमुख रिटों व उनकी प्रकृति का उल्लेख निम्नवत् हैं-
(i) बंदी प्रत्यक्षीकरण- यह एक लैटिन शब्दावली है जिसका अर्थ है ‘निरुद्ध व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करो।’ इस रिट के द्वारा न्यायालय किसी गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने का आदेश देता है, विरुद्ध करने के कारणों को बताने को कहता है और यदि गिरफ्तारी का तरीका या कारण गैरकानूनी या असंतोषजनक हो, तो न्यायालय गिरफ्तार व्यक्ति को छोड़ने का आदेश दे सकता है।

भारतीय संविधान : सामान्य प्रश्नोत्तरी.....

1.संविधान सभा की प्रारूप समिति द्वारा प्रस्तुत प्रारूप संविधन में कितनी अनुसूचियाँ थी ? 
- आठ।
2. संविधान सभा द्वारा अंतम रूप् से पारित संविधान में कुल कितनी अनुसूचियाँ थी - आठ।
3. वर्तमान में भारतीय संविधान में कुल कितनी अनुसूचियाँ है ? 
- 12
4. किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में 9वीं अनुसूची जोडी गई ? 
- पहला।

5. 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 1952 में कोन सी अनुसूची को भारतीय संविधान में शामिल किया गया ? 
-10वीं।
6. 73वंे संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीयस संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई ? 
- 11वीं।
7. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में कोैन स अनुसूची जोड़ी गई ? 
- 12वीं।
8. संविधान के द्वितीय अनुसूची का संबंध है ? 
- पदाधिकारियों के वेतन से ।
9. भारत संघ में शामिल राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों का उल्लेख भारतीय संविधान के किस अनुसूची में है ? 
- प्रथम अनुसूची में।
10. राष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों, सर्वोच्य तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आदि के वेतन के संबंध में प्रावधान संविधान किस अनुसूची में किया गया है ?
- द्वितीय अनुसूची में।
11. भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची का सम्बंध है ? 
- शपथ तथा प्रतिज्ञान से।
12. संविधान की किस अनुसूची में प्रत्येक राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों के लिए राज्यसभा में स्थानों के आवंटन की सूची है ? 
- चतुर्थ अनुसूची मे से।
13. भारत के संविधान की छठी अनुसूची का प्रमुख उपबंध सम्बन्धित है ? 
- जनजातीय क्षेत्र से।
14. भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है, इन राज भाषओं का उल्लेख किसा अनुसूची में है ? 
- आठवीं में।
15. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची का संबंध है ? 
- राष्ट्रीय भाषा से।
16. किसी अधिनियम को संविधान की किस अनुसूची में सम्मिलित करने पर उसकी वैधता को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है ? 
-’ 9वीं।
17. किस राज्य के आरक्षण विधेयक को 9वीं अनुसूची में सम्मिलित किया गया है 
- तलिनाडू को।
18. छल बदल के आधार पर निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता संबंधी विवरण संविधान की किस अनुसूची में दिया गया है ? 
- 10वीं में।
19. भारतीय संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची का संबंध है ? 
- पंचायत राज व्यवस्था का प्रावधान।
20. भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची का संबंध है 
- नगरपालिकाओं के अधिकार संबंधी प्रावधान
21. यदि भारत संघ को एक नए राज्य का सृजन करना हो तो संविधान को अनुसूचियों में से किस अनुसूची को अवश्य संशिोसधन किया जाना चाहिए ? 
- पहली।
22.संविधान सभा द्वारा अंतिम रूप् से पारित संविधान में कुंल कितने अनुच्छेद एवं अनुसूचियाँ है ? 
- 395 एवं 8।
23. वर्तमान में भारतीय संविधान में गणना की दृष्टि से कितने अनुच्छेद और अनुसूचियाँ है ? 
- 450 एवं 12।
24. संविधान के किस अनुच्छेद में यह अंकित है कि भारत राज्यों का संघ होगा ? - पहला।
25. भारती संविधन के किस अनुच्छेद में नागरिकता सम्बन्धी प्रावधान है ? 
- 5 - 11
26. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किये गये है ? 
- 12 से 35
27. कौन सा अनुच्छेद नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थाओं में समाज के कमजोर वर्ग के लिए आरंक्षण उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार को अधिकार प्रदान किया गया है ?
- 16
28. स्ंविधान के किस अनुच्छेद के तहत छुआ छुत एवं अस्पृश्यता को समाप्त किया गया ?
- 17
29. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में प्रेस की स्वतंत्रता दी गई है ?
- 19 (अ) में।
30. मौलिक अधिकार के अन्तर्गत कौन सा अनुच्छेद बच्चों के शोषण से संबंधित है 
- 24
31. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण की व्यवस्था है ? 
- 29 में।
32. कौन से अनुच्छेद के तहत भारत का सर्वोच्य न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है ? 
- 32
33. भारतीय संविधान के किन अनुच्छेदों में राज्य नीति निर्देशक तत्वों का उल्लेख है ? 
- 36 से 51
34. भारतीय संविधान के अन्तर्गत कल्याणकारी राज्य की अवधारणा किस अनुच्छेद में वर्णित है ? 
- 39 में।
35. भारतीय संविधान के कौन सा अनुच्छेद राज्य सरकारों को ग्राम पंचायतों को संगठित करने का निर्देश देता है ? 
- 40
36. 42वें संशोधन द्वारा संविधान किस अनुच्छेद में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया है ? 
- 51 (अ) में।
37. स्ंघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी, जिनका प्रयोग वह स्वंय या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा, किस अनुच्छेद में वर्णित है ? 
- 53
38. भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत अन्तर्गत भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया जा सकता है ? 
- 61
39. स्ंविधान के किस अनुच्छेद में उपराष्ट्रपति पद का प्रावधान किया गया है ? 
- 63
40. स्ंविधान के किस अनुच्छेद के तहत मंत्रिगण सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उतरदायी है ? 
- 75
41. कौन सा अनुच्छेद भारत के महान्यायावादी की नियूक्ति से संबंधित है ? - 76
42. कौन सा अनुच्छेद संसद के दो अधिवेशनों के बीच छः माह के अन्तराल की अनिवार्यता का वर्णन करता है ? 
- 85
43. संविधान के किस अनुच्छेद के द्वारा संसद की संयुक्त बैठक का प्रावधान किया गया है ? - 108
44. संविधान के किस अनुच्छेद में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है ? 
- 110
45. संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राष्ट्रपति अध्यादेश जारी करता है ? 
- 123
46. संविधान के किस अनुच्छेद में सर्वोच्य न्यायालय के न्यायाधीश पर पहाभियोग चलाये जाने का प्रावधान है ? 
- 124
47. राष्ट्रपति सर्वोच्य न्यायालय से संविधान ेके किस अनुच्छेद के अंतर्गत परामर्श ले सकता है ?
- 143
48. सर्वोच्य न्यायालय अपने द्वारा सुनाये गये किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन कर सकता है। यह व्यवस्था संविधन के किस अनुच्छेद में वर्णित है ? - 137
49. भारतीय संविधान में सर्वोच्य न्यायालय तथा उच्च न्ययालय को न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति प्रदान की गई है, यह व्यवस्था संविधान के किस अनुच्छेद में है ? 
- 226
50. स्ंविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत अधीनस्थ या जिला न्यायालय का प्रावधान किया गया है ? 
- 233
51. स्ंविधान के किस अनुन्छेद के तहत अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र के पास है ?
- 248
52. राज्यों द्वारा माँग करने पर भरत की संसद उन राज्यों के लिए किस अनुच्छेद के अन्तर्गत कानून बना सकती है ? 
- 252
53. संविधान का कौन सा अनुच्छेद संसद की राज्य सूचि के किसी विषय पर विधान बनाने की शक्ति देता है ? 
- 249
54. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद संसद को अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए विधि निर्माण करने की शक्ति प्रदान करता है ?
- 253
55. केन्द्र राज्य के प्रशासनिक सम्बन्ध भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में वर्णित है ? 
- 256 से 263।
56. सवंधिान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत केन्द्र सरकार राज्य सरकारांे को निर्देश दे सकती हैं ?
- अनुच्छेद 256।
57. अन्तर्राज्यीय परिषद् के गठन का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत किया गया है ? 
- अनुच्छेद 256।
58. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत विŸा आयोग के गठन का प्रावधान है ? 
- 280।
59. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में बताया गया है कि सम्पति का अधिकार कानून अधिकार है ? 
- अनुच्छेद 300 (क)।
60. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में नैसर्गिक न्याय के प्रसिद्ध सिद्धांत के अधिकार का समावेश किया गया है ? 
- अनुच्छेद 311
61. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राज्यसभा नई अखिल भारतीय प्र्रशासनिक सेवाओं की रचना प्रस्तावित कर सकता है ? 
- अनु0 312।
62. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा लोक संवाओं को संरक्षण प्रदान किया गया है ? 
- अनु0 311
63. स्ंाविधान के किस अनुच्छेद द्वारा संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया है ? 
- अनु0 315
64. संघ स्लोक सेवा आयोग के कार्याे का उल्लेख किस अनुच्छेद में है ?
- अनु0 320
65. किस अनुच्छेद के अधीन निर्वाचनों का निरीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण करने के लिए निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई है ? 
- अनु0 324
66. संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा लोसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधित्व हेतु प्रावधान किया गया है ? 
- 331
67. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में अनुसूचित जनजातियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग का प्रावधान है ? 
- अनु0 338 (क)।
68. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है ?
- अनु0 343 (झ)।
69. किस अनुच्छेद में यह प्रावधान किया गया है कि संघ की राजभाषा हिन्दी तथा लिपि देवनागरी होगी ? 
- अनु0 343।
70. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करता है ? 
- अनु0 352।
71. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है ? - ªपति शासन लागू किया जा सकता है ? 
- अनु0 356।
72. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के आधार पर विŸाीय आपात की उद्घोषणा राष्ट्रपति करता है ? 
- अनु0 360।
73. भारतीय संविधान में मंत्रिमंडल शब्द का एक बार प्रयोग हुआ है, यह किस अनुच्छेद में है ? 
- अनु0 352
74. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत प्रत्येक राज्य मातृभाषा का प्रसार एवं अनुदेश प्राथमिक शिक्षा में लागू कर सकता है ?
- अनु0 350(क)।
75. किस अनुच्छेद में संसद को संविधान संशोधन का अधिकार दिया गया है ? 
- अनु0 368 में
76. कौन-सी धारा के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है ?
- अनु0 370
77. भारतीय संविधान के किस अनच्छेद के अंतर्गत नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष उपबंधों का प्रावधान किया गया है ? 
- 371(क)।
78. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत शासन अधिनियम, 1935 के निरसन का स्पष्ट प्रावधान किया गया है ? - अनु0 395
79. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में भारत सरकार द्वारा भारतरत्न, पद्म विभूषण आदि अलंकरण प्रदान करने का प्रावधान है ? 
- अनु0 18
80. भारत के संविधान के किस अनुच्छेद में उपबंध है कि चैदाह वर्ष से कम उम्र के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जायेगा ? 
- अनु0 24 में।

भारतीय संविधान : सामान्य प्रश्नोत्तरी.....

1.संविधान सभा की प्रारूप समिति द्वारा प्रस्तुत प्रारूप संविधन में कितनी अनुसूचियाँ थी ? 
- आठ।
2. संविधान सभा द्वारा अंतम रूप् से पारित संविधान में कुल कितनी अनुसूचियाँ थी - आठ।
3. वर्तमान में भारतीय संविधान में कुल कितनी अनुसूचियाँ है ? 
- 12
4. किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में 9वीं अनुसूची जोडी गई ? 
- पहला।